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क्या कभी परीक्षा के दौरान क्लास के दूसरे बच्चों के पेपर में झाँकने का आपका मन किया है? अगर हाँ, तो ऐसा सिर्फ आपके साथ नहीं हुआ. बारहवीं कक्षा में पढ़नेवाली जॆना, अपनी क्लास के कई बच्चों के नकल करने के बेशर्म रवैए के बारे में इस तरह कहती है: “वे शेखी बघारते हुए बताते हैं कि उन्होंने नकल कैसे की. अगर आप नकल नहीं करते तो वे आपको अजीब निगाहों से देखते हैं!”

नए ज़माने के नकल करनेवाले कई धूर्त तरीके अपनाते हैं. किसी का होमवर्क नकल करना या परीक्षा के दौरान चुपके से परचे में से नकल करना, ये सारे तरीके तो आज की आधुनिक तकनीकों और तरकीबों के आगे बिलकुल फीके पड़ जाते हैं. आधुनिक तकनीक में पेजर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी मदद से परीक्षा में आए सवालों के जवाब दूसरे व्यक्‍ति से लिए जा सकते हैं; कैलकुलेटर में ऐसे प्रोग्राम बनाए गए हैं, जिसमें “अतिरिक्‍त” जानकारी मिलती है; कपड़ों में बिलकुल छोटे कैमरे छिपे होते हैं

जिससे दूसरी जगह मौजूद मददगार तक परीक्षा में आए सवाल पहुँचाए जाते हैं; कुछ आधुनिक कैलकुलेटर ऐसे हैं जो इंफ्रारॆड रेडिएशन के ज़रिए क्लास में बैठे दूसरे विद्यार्थी तक संदेश पहुँचाते हैं, यहाँ तक कि ऐसी इंटरनॆट साइट्‌स भी हैं, जिनमें किसी भी विषय पर पूरा-का-पूरा जवाबों का परचा पाया जा सकता है!

नकल करने के इस खतरनाक चलन को रोकने और उस पर काबू पाने के लिए शिक्षक काफी कोशिश कर रहे हैं, मगर यह इतना आसान नहीं है. क्योंकि नकल करने के मतलब के बारे में सभी विद्यार्थियों या शिक्षकों की राय अलग-अलग है. मसलन, जब किसी प्रॉजॆक्ट पर विद्यार्थियों का समूह काम करता है तो इसमें मिलकर ईमानदारी से किए काम और साँठ-गाँठ से बेईमानी के काम के बीच की रेखा, साफ-साफ नज़र नहीं आती.

ऐसे भी कुछ विद्यार्थी होते हैं जो समूह का फायदा उठाते हुए सारा काम दूसरों पर छोड़ देते हैं. सरकारी कॉलेज में पढ़नेवाला युजी कहता है, “कुछ विद्यार्थी तो बेहद आलसी होते हैं. वे कुछ भी नहीं करते! फिर भी उन्हें उनके बराबर अंक मिलते हैं जिन्होंने असल में सारी मेहनत की थी. मेरे हिसाब से यह भी नकल करना ही है!”

चाहे स्कूल के किसी टेस्ट की बात की जाये या फिर कॉलेज के, आपको हर जगह ऐसे नमूने मिल जायेंगे, जो सामने टीचर की आँख में धुल झोंक कर चीटिंग करने में माहिर हो. अब आप सोच रहे होंगे की आखिर हम आपको ये क्यों याद दिला रहे है तो बता दे की आज हम आपके लिए ऐसे ही कुछ जग के न्यारे धुरंधरों की कुछ बेहद अजीबो गरीब तस्वीर ढूंढकर लेकर आये है,जिसे देख आपके भी मुह से निकल जायेगा कि “वाह”!गुरु जी आप तो खिलाडी निकले.”आइये देखते है इन नक़लखोरो के कुछ नमूनों को.

1)वाकई छोरी छोरों से कम हैं के…!

2)वाह!टिशु का ऐसा इस्तेमाल शायद ही किसी ने पहले देखा होगा…

3)जितनी मेहनत इसने की है, इसे जरूर ओस्कर मिलना चाहिये…

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